ग़ाफ़िल की कलम से

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अन्ना दादा! वो भ्रष्टाचारी तो हम महाभ्रष्टाचारी

Posted On: 1 Mar, 2012 में

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अन्ना दादा! आप ओैर हम सब मिलकर बहुत हल्ला मचा लिए भ्रष्टाचार पर। राजनेताओं और तन्त्र पर आरोप लगाते-लगाते, अनशन करते-करते और धमकी देते-देते हम सब ऊब चुके तो हम यू. पी. वालों ने राजनेताओं से अबकी चुनाव में पूरा-पूरा बदला ले लिया। घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है। अपने भ्रष्टाचार के बूते राजनेतागण जितना पैसा बतौर घूस जनता से वसूलते पांच सालों में उससे कई गुना ज़्यादा हम लोगों ने वसूल कर लिया। जितने उम्मीदवार खढ़े थे एक-एक से पैसा लेकर वोट दिया है हम लोगों ने। अब वे कमाते रहें पांच वर्ष भरपाई नहीं कर पायेंगे। वे भी सोचें कि भ्रष्टाचारी को कोई महाभ्रष्टाचारी मिला। एक-एक वोट की क़ीमत वसूली है हम लोगों ने सभी उम्मीदवारों से और हाथ भी जुड़वाये तथा पैर पर भी गिरवाये तिस पर तुर्रा यह कि वोट दिया किसी एक को। अग़र न यक़ीन हो तो आइए हमारे गांव हजारों गवाहियां पेश…आगे

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
02/03/2012

गाफिल साब नमस्कार ! समझ नहीं आ रहा की क्या लिखोंन ! नई बात और झटका देने वाली बात बताई है आपने ! ख़ुशी इस बात की है की इन्हें भे कोई सवा शेर मिला , दुःख इस बात का की ये लोकतंत्र कहाँ जा रहा है ? बहुत बेहतर ! http://yogensaraswat.jagranjunction.com/2012/02/23/


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