ग़ाफ़िल की कलम से

कबाड़ा

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बहुत बोले! करके दिखावो तो जानें!!

Posted On: 22 Mar, 2012 Others में

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जिस देश में मेहनत और ईमानदारी से किए गये कार्यों के पारिश्रमिक की भी प्राप्ति हेतु आवश्यक रूप से घूस देना पड़ता हो तो उस देश का भविष्य क्या हो सकता है? आप सभी अनुमान कर सकते हैं कि विद्यालयीय कार्मिकों की कोई भी ऐसी कमाई नहीं होती जिसे आमतौर पर ऊपरी कमाई कहा जाता है। अब उसे भी यदि अपना वेतन भुगतान कराने के लिए घूस देना पड़े तो उसकी हालत क्या होगी? आप सोच रहे होंगे कि मैं यह क्या मामला उठा बैठा? तो साहब बता दूं कि वह दुर्भाग्यशाली कर्मी मैं ही हूँ। हम लोगों का वेतन क्षेत्रीय शिक्षा निदेशक कार्यालय, लखनऊ से पास होता है। वहां का एक बाबू, जो हमारे विद्यालय को डील करता है, की नज़ाक़त यह कि बगै़र पैसा लिए वह आपसे बात करने के लिए सर तक नहीं उठाता। छठे वेतनमान के मद्देनज़र हमारा वेतन निर्धारण होना था। उसके लिए उसने दो बार घूस लिया हमारी मज़बूरी कि दिये। अब उसका एरियर पास होना है नहीं तो आगामी सत्र के लिए लटक जायेगा। मार्च का महीना है, फरवरी का वेतन भी पास होना है यदि इस महीने में नहीं पास हुआ तो मई तक जाकर मिल पायेगा। हमारी मज़बूरी उसकी चांदी हो गयी। हर क़दम पर वह पैसा मांग रहा है वह भी जबरन। न दें तो तीन महीने घर का ख़र्च कैसे चले। हम लोगों की ऊपरी कमायी कुछ है नहीं। क्या करें? हमने सोचा कि बहुत सारे ब्लॉगर भाई हैं जो भ्रष्टाचार पर इतना कुछ लिख मारे कि सैकड़ों पुस्तकें तैयार हो सकती हैं, बहुत सारे पत्रकार बन्धु भी ब्लॉग से जुड़े हैं जो इस मामले में हमारी मदद कर सकते हैं या अनेक अधिकारी वर्ग भी हमारी ज़मात में हैं जिनसे हम सहायता की अपील कर सकते हैं तो भला बताइए कोई है हमारे साथ हमारी मदद करने को तैयार? वह बाबू खुलेआम पैसा लेता है। उसके पास यदि आप एक घंटे खड़े हो जाइये तब तक कईयों से वह पैसा आपके सामने ही ले चुका होगा वह ढीठ। उसका स्टिंग ऑप्रेशन भी हो सकता है पर कोई सक्षम, हिम्मती, दिलदार तैयार हो यह सब करने को तब न नहीं तो भ्रष्टाचार के विरोध में केवल कहने और लिखने से कुछ नहीं होने वाला। अगर आप सदाचारी बुद्धिजीवी हमारे साथ हैं तो हम इस भ्रष्टाचार की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं वर्ना मज़बूर हैं कि उसे उसका मनमानी घूस दें, अपना वेतन पास करायें और भ्रष्टाचार को मज़बूत बनायें। हम अपने परम सहयोगी, तेज़तर्रार पत्रकार बन्धु महेन्द्र श्रीवास्तव से विशेष आशा रखते हैं और जो भी कोई सदाचारी, जागरूक हमारा सहयोग करने को तैयार हों वे हमसे सम्पर्क कर सकते हैं फोन नं. 09532871044 तथा ईमेल- cm07589@gmail.com पर। हमें आपके मानसिक और भौतिक सहयोग की महती आवश्यकता है। जागरण जंक्शन मंच के माध्यम से ऐसी विकट समस्याओं के ज़ानिब हम ध्यान आकृष्ट कराना चाहते हैं अपने युवा और तेज़ मुख्यमन्त्री श्रीमान् अखिलेश यादव जी का भी।
-ग़ाफ़िल

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30 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

thanks to all

Akhilesh Sharma के द्वारा
15/06/2012

भ्रष्टाचार को रोकने मेँ आज ही आगे आना होगा नहीँ देर हुयी तो देखते ही देखते भ्रष्ट हो जायेगा ?

रिजवान के द्वारा
23/03/2012

नमस्कार मिश्र जी! घूसख़ेरी के ख़िलाफ़ आपकी अपील के हम क़ाइल हैं और उम्मीद करते हैं कि इस मंच के माध्यम से आपकी बात हरसू फैलकर अपना वाज़िब असर दिखाएगी। शुक्रिया

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    आदाब रिज़वान साहब! बहुत-बहुत शुक्रिया

अफ़साना के द्वारा
23/03/2012

घूसखोरी इस देश से तब तक नहीं जाएगी जब तक उसका विरोध प्रत्येक स्तर पर आम जन द्वारा नहीं होगा! वाकई में अब तक सब केवल बोलते ही आये हैं, अनशन ही करतक आये हैं पर सही जगह जहां करना चाहिए किसी ने इसका विरोध नहीं किया। सभी चाहते हैं कि थोड़ा ले दे के अपना काम निकल जाय बस। आपका यह आह्वान क़ाबिले तारीफ़ है। हम आपके साथ हैं। जागरण एक सक्षम मंच है वह इस बात को अवश्य जन-जन और सरकार तक पहुंचाएगा ऐसी उम्मीद की जानी चाहिए। पुनः आभार आपका

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    अफ़साना जी! बहुत-बहुत शुक्रिया

के द्वारा
23/03/2012

नमस्कार! हम आपके पक्ष में हैं और उम्मीद करते हैं कि जागरण फोरम इस मामले को सरकार तक पहुंचाने में जो कुछ करना होगा सब करेगा। आभार आपका जो ऐसे मामले आप खुलकर हम सब तक लाए इस मंच के माध्यम से।

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    बहुत-बहुत आभार

susheel के द्वारा
23/03/2012

ग़ाफ़िल साहब को नमस्कार! आपने बहुत सही मुद्दे को एक सही मंच पर लाया। पूरा जागरण जंक्शन परिवार आपके साथ है। इन घूसखोरों की वाट लगनी ही चाहिए

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    सुशील जी को नमस्कार! और बहुत-बहुत आभार

के द्वारा
23/03/2012

यह तो बहुत बुरी बात है जागरण को चाहिए कि इस मुद्दे को अपने सम्पादकीय में छाप कर सबके सामने लाए। हम सब इस बात का विरोध करते हैं।

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    नमस्कार! आभार

yogi sarswat के द्वारा
23/03/2012

गाफिल जी नमस्कार ! आपने जिन परिस्थितियों का उल्लेख किया है , उनसे लगभग हर कोई प्रतिदिन दो चार होता है ! आपने एक बेहतर काम के लिए बीड़ा उठाया है , मैं इस पुण्य कर्त्तव्य में आपके साथ खड़ा हूँ ! आपकी लड़ा आपकी अकेले की नहीं है बल्कि एक सामान्य जनमानस की लड़ाई है ! इसे ज्यादा से ज्यादा समर्थन मिलना ही चाहिए ! आपसे बात करता हूँ ! बहुत आभार , अपनी बात इस मंच तक लाने के लिए !

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    योगी जी को नमस्कार…बहुत-बहुत आभार

के द्वारा
23/03/2012

सादर नमस्कर! आप और मेरे जैसे लोगों को जब अपना काम निकलना होता हैं तो चाहते हैं कि किसी तरह से निकल जाएँ और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देते चले जाते हैं…..छोडिये जो हुआ सो हुआ….चूँकि एक समस्या प्रत्यक्ष रूप से हमारे सामने आ चूँकि हैं तो इसका नितांत समाधान भी आवश्यक हैं. इस समस्या कि निंदा करने की बजे मैं अपने ब्लॉग साथियों से अपील करता हूँ कि इस समस्या का समाधान क्या निकला जाय. आख़िरकार समाधान की शुरुवात, हम लोगों को तो करना होगा ही. इसके साथ ही मैं Jagran Junction Forum से विनती करता हूँ कि दैनिक जागरण के सम्पादकीय पृष्ठ पे कुछ चुनिन्दा ब्लागरों के आलेख को छापने के पक्षपात को छोड़कर ऐसी समस्याओं वाले ब्लॉग को सम्पादित करें ताकि समस्या सरकार ,प्रशासन और समाज के सामने स्पष्ट रूप से पहुँच सके………हार्दिक आभार!

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    आप सही कह रहे हैं आभार आपका

Ravindra K Kapoor के द्वारा
23/03/2012

बहूत चुभती परम सत्य सी बात को आपने सुन्दर रूप से जागरण के माध्यम से नए मुख्यमंत्रीजी तक पहुचाने का प्रयत्न किया है मेरी शुभकामनाएं. वृन्दावन और गोकुल के आस पास को World Heritage बना कर ( “आईये वृन्दावन और गोकुल बचाएं” पहला चरण ) अपने देश के गौरव और सांस्कृतिक विरासत को बचाने हतु एक छोटा सा प्रयास मेरा भी है कृपया Signature Campaign में आप अपना बहुमूल्य सहयोग दे कर इसे अपना प्रयास बनाने के लिए आगे आयें. ये मातृभूमि आपकी ऋणी रहेगी. सुभकामनाओं के साथ…रवीन्द्र

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    रवीन्द्र जी आपका आभार। हम हरविध आपके प्रयास में सहयोगी रहेंगे

ajaydubeydeoria के द्वारा
23/03/2012

मिश्र जी नमस्कार, शिक्षा विभाग तो और भी भ्रष्ट हो गया है. यहाँ के बाबुओं की कारिस्तानियों को देख कर दिमाग चकरा जाता है. आप अपना ही पैसा बिना चढ़ावा चढ़ाये नहीं पा सकते. कितना भी भ्रष्टाचार पर हो-हल्ला हो वह अपनी ही मनमानी करतें हैं. एक तरह से कहिये तो वह गुंडा-गर्दी के बल पर पैसा वसूलते हैं.

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    आप सही कह रहे हैं दूबे जी! ऐसी बड़ी ऑफ़िसों के बाबू जहाँ से वेतन आदि का भुगतान होता है, प्रतिदिन कम से कम 10 हज़ार रूपए तक की ऊपरी आमदनी का औसत पूरा करते हैं। इसे क्या अधिकारी वर्ग नहीं जानता? ऊपर से नीचे तक उसी में शामिल हैं। इसके लिए हम सभी को जागरूक होकर सुनियोजित मुहिम चलानी होगी। अन्ना की तरह नहीं। आपका आभार

dineshaastik के द्वारा
23/03/2012

आश्चर्य आप जैसे ब्लॉगर से जब ऐसा व्यावहार तो सामान्यजन उससे कितना पीड़ित होगा। क्या कानूनी प्रक्रियाओं द्वारा उसे सबक नहीं सिखाया जा सकता? इस संबंध मे जी न्यूज पर एक कार्यक्रम आता है, क्या आप उससे लाभ नही उठा सकते हैंय़ क्या आप अन्ना टीम के किसी सदस्य को इस समस्या से अवगत नहीं करा सकते?

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    23/03/2012

    अन्ना टीम क्या कर सकती है हमें पता है दिनेश जी! एक अन्ना को छोड़ कर बाकी सब के सब नाम के भूखें हैं। जहां ज़रूरत होती है वहां इनकी लड़ाई नहीं होती रामलीला मैदान में ये लड़ते हैं रावण से राम बनकर बिल्कुल आज की नौटंकी की तरह। आभार आपका

    dineshaastik के द्वारा
    25/03/2012

    गाफिल जी नाम की भूख मानव का स्वाभिक अवगुण है। कुछ भी हो उसका अंतिम लाभ तो जन साधारण को मिलेगा, खास तौर पर अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति की सत्ता में अप्रत्यक्ष भागेदारी सभंव होगी।   माना उनमें माना हैं भी, लेकिन इन भ्रष्टाचारी, बलात्कारी, अत्याचारी, व्यापारी, हाईकमान के चाटुकारी, रिश्वत खोरी व्यवस्था के सहकारी (जिनके कारण आज आपको इस तरह की समस्या से जूझना पढ़ा) नेताओं से तो कई गुना अधिक अच्छे हैं। कुछ अधिक लिख दिया हो तो माफ करें….. http://dineshaastik.jagranjunction.com/author/dineshaastik/

    भाई जी नेताओं में खोट मत निकालिए! पहले मैं भी निकालता था पर जब शालिनी जी के आलेख पर ध्यान गया तो एक सदमा सा लगा और यह काम करना बन्द कर दिया। हमारे जिस समस्या पर आप सब ने अपना अनमोल वक्त दिया और हमारे प्रति सहानुभूति दिखाई उसके लिए आभार पर अब हमने उस समस्या को ही समाप्त कर दिया सारा दोष अपने ऊपर लेते हुए। शालिनी जी का आलेख पढ़ा और मान लिया कि गल्ती किसी और की नहीं हमारी ही है। अगर कोई घूस लेता है तो वह उसका अधिकार है क्योंकि जड़ तो कहीं न कहीं हमीं में है। हमने ही उसे बोया तो काटेगा कौन? और हमने घूस दे दिया। अपना वेतन पास करा लिया। आप भी पढ़ें शालिनी जी का आलेख-http://cbmg.jagranjunction.com/2012/03/01/%E0%A4%85%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A4%BE-%E0%A4%B5%E0%A5%8B-%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0/

मनोज कुमार के द्वारा
22/03/2012

हम तैयार हैं।

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    22/03/2012

    धन्यवाद सर!

Anwer Jamal के द्वारा
22/03/2012

waah…

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    22/03/2012

    शुक़्रिया डॉ. साहब

rahulpriyadarshi के द्वारा
22/03/2012

मिश्र जी,नमस्कार,आपके अपनी परेशानी से इस ब्लॉग के माध्यम से अवगत कराया,बड़ा क्षोभ होता है जब अपनी मेहनत की कमाई हासिल करने में भी मेहनत करनी पड़ती है,वो भी अनैतिक चढ़ावे के साथ.वैसे एक बात और है कि आजकल शिक्षा महकमे में भ्रष्टाचार कुछ ज्यादा ही सर चढ़ कर बोलने लगा है.

    ग़ाफ़िल के द्वारा
    22/03/2012

    हल्ला मचाना अलग बात है मगर साथ चलकर क़दम मिलाना और बात है देखते हैं कि कितने लोग साथ आते हैं राहुल जी! आपका आभार कम से कम आपने यह पोस्ट न केवल पढ़ी बल्कि प्रतिक्रिया भी की वर्ना तो सुबह से अब तक कोई इसे देखने तक की ज़ेहमत नहीं उठाई


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